तलाक के विषय में वेद क्या कहते हैं क्या तलाक लेना-देना उचित है ?

तलाक क्या होता है, क्यों होता है, क्या तलाक देना उचित है ?

तलाक

वेद तलाक की अनुमति नहीं देते । वे इसका प्रबल विरोध करते हैं । आर्य विवाह पवित्र अटूट एवं कभी नष्ट न होने वाला सम्बन्ध होता है । मृत्यु हो जाने पर भी यह सम्बन्ध नहीं छूटता । विवाह को अटूट एवं स्थिर भौतिक सम्बन्ध बनायें जाने के लिए विवाह संस्कार के समय अग्नि प्रज्वलित की जाती है । वर-वधू परिक्रमा करते हुए अग्नि को साक्षी करके  एक-दूसरे एवं समाज के प्रति कर्तव्यपालन का व्रत लेते हैं । इस देश में यह पुरानी प्रथा चली आ रही है कि दो व्यक्ति या दो पक्ष अग्नि के समक्ष जो प्रतिज्ञा करते हैं, वह भंग नहीं की जा सकती ।

अग्नि को साक्षी का प्राय: गलत अर्थ लिया जाता है और इसे अग्नि पूजा की संज्ञा दी जाती है । अग्नि की उपस्थिति का वास्तविक उद्देश्य यह दिखाना होता है कि अग्नि की सहायता से प्रतिज्ञा की गई है । अग्नि विविध पदार्थों का संघात बनाती है । नए संघातों में नए-नए द्रव्य समाहित होते है और वे सहज ही अपने मूल तत्वों में पुन: परिवर्तित नहीं हो सकते, इसलिए कि अग्नि ने उन्हें दृढ़ बंधनों से जकड दिया होता है । इस प्रकार से निर्मित नवीन पदार्थ को सरलता से एक दुसरे से अलग किया जा सके । अग्नि के समक्ष सम्पन्न विवाह संस्कार अकाट्यता और विवाह-विच्छेद के निषेध का प्रतिक होता है । गोडसे ने देश विभाजन के कारण गाँधी को मारा 

अथर्ववेद (14,1,22) विवाह विच्छेद का इन शब्दों में निषेध करता है :-

इहैव स्तं म वियौषटम्, विश्वमायुर्व्यश्नुतम् ।

करीडन्तौ पुत्रनप्तृभि:, मोदमानौ स्वस्तकौ ।।

अन्योन्यस्याव्यभीचारो भवेदामरणान्तिक: ।

एष धर्म: समासेन ज्ञेय स्त्री पुं सयो: पर: ।।

यह बात भी ध्यान देने योग्य है की बाइबिल में भी, जिस पर आर्य प्रभाव पड़ा है तलाक का विधान नहीं किया है । वह उल्टे इसका खंडन ही करता है । स्त्री के तीन रूप और उनका महत्व क्या हैं ?

ऐसा कहा गया है जो कोई भी अपनी पत्नी का परित्याग करेगा, उसे लिखित तलाकनामा देना होगा ।

परन्तु मैं तुमसे कहता हूँ कि जो भी कोई व्यभिचारी के कारण को छोड़कर अपनी पत्नी को त्यागता है वह उसके पर-पुरुष गमन का कारण बनता है तथा जो भी तलाक दी हुई स्त्री से विवाह करता है व्याभिचार करता हैं ।

विदेशों में तलाक

अमेरिका तथा रूस जैसे अत्यंत उन्नत समझे जाने वाले देशों में आज भी तलाक एक बड़ी सामाजिक बुराई समझी जाती है । कोई समय था जबकि रूस में एक जोड़ा जूता खरीदने की अपेक्षा तलाक प्राप्त करना अधिक सस्ता था । परन्तु सामाजिक, पेचीदगियों परिवारों के विघटन और बच्चों की समस्याओं का अनुभव करते हुए अब तलाक को बहुत  निरुत्साहित किया जाता है । अमेरिका में परित्यक्त गुमनाम सोसाइटीयां इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए कठोर परिश्रम कर रही है तथा तलाक शुदा नर नारी पुनर्मिलन के लिए मनाये जा रहे है । एक सोसाइटी के अध्यक्ष ने एक बार कहा था कि ‘तलाक’ कैंसर की बीमारी है इसकी रोकथाम जल्दी करो नहीं तो तुम्हें चट कर जाएगी ।

यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि तलाक प्रथा जो शायद पाश्चात्य समाज में अनमेल विवाहों के इलाज के लिए शरू की गई थी आज लाखों घरों की सुख शांति के लिए खतरा बन गई है यह बात बड़ी खेदजनक है की यह बुराई जिसके दुष्परिणामों से पश्चिम त्रस्त था हमारे देश में कानून द्वारा लादी गई है । इस कानून सम्मत बुराई के अभिशाप तलाकों के मुकदमों की भरमार से सुस्पष्ट हैं । इसने असंख्य घरो का विघटन किया है । इससे भी बढ़कर दुःख की बात यह है कि यहाँ भी पीड़ित स्त्री ही है । स्त्रियों की बहुसंख्या अशिक्षित है और उनके पास मुकदमा लड़ने के लिए पैसा नहीं है । मुस्लिम धर्म परिवर्तन और शुद्धि आन्दोलन 

  • वैदिक धर्मी

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