शारीरिक शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायक कैसे ?

शारीरिक शिक्षा के मूल तत्व

शारीरिक शिक्षा

“शरीरमाद्यं खलु धर्म साधनम्”- शरीर समस्त धर्म का साधन है । हमारी ज्ञान शक्ति, इच्छा शक्ति की भी अभिव्यक्ति का माध्यम शरीरी हैं । स्वस्थ काया में स्वस्थ मन निवास करता है । जीवन के सुख के लिए स्वस्थ मन आवश्यक है । इस स्वस्थ मन के लिए शरीर का स्वस्थ होना आवश्यक है । शरीर के स्वास्थ्य के लिए शारीरिक शिक्षा का महत्व सभी ने स्वीकार किया है । यह उक्ति प्रसिद्द है कि बहुबल से रक्षित राष्ट्र ही शास्त्र का चिंतन कर सकता है । शारीरिक शिक्षा से बल्किन में जो पौरुष, बल एवं शक्ति का विकास होगा, उसी से हमारे देश में अध्ययन, अनुसन्धान,म देश की सीमा की रक्षा, विश्व में शांति, कल-कारखानों तथा खेत-खलिहानों में उत्पादन की वृद्धि संभव होगी । शारीरिक प्रशिक्षण से छात्रों में सामुहित भावना अनुशासन एवं व्यवस्थित कार्य करने की अभूतपूर्व क्षमता उत्पन्न होती है । उससे स्वस्थ समाज का निर्माण होता है । इस प्रकार शारीरिक शिक्षा व्यक्ति, समाज राष्ट्र एवं विश्व के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है ।

बच्चों का पालन-पोषण कैसे करें ताकि बच्चे निर्भीक/साहसी और वीर बने ??

विवेकानंद के शारीरिक शिक्षा के प्रति विचार

विवेकानंद ने शारीरिक बल पर अत्यधिक आग्रह किया है । उनके शब्दों में –“अनन्त शक्ति ही धर्म है । बल पुण्य है और दुर्बलता पाप । सभी पापों और सभी बुराइयों के लिए एक ही शब्द पर्याप्त है और वह गई-दुर्बलता आज हमारे देश  को जूस वस्तु की आवश्यकता है, वह है लोहे की मांसपेशियां और फौलाद के स्नायु, दुर्दमनीय प्रचंड इच्छाशक्ति, जो सृष्टि के गुप्त तथ्यों और रासस्यों को भेड़ सके और चाहे उसके लिए समुब्द्र तल में ही क्यों न जाना पड़े-साक्षात् मृत्यु का ही सामना क्यों न करना पड़े । मेरे नवयुवक मित्रों! बलवान बनो । तुम को मेरी सलाह है । गीता के अभ्यास की अपेक्षा फ़ुटबाल खेलने के द्वारा तुम स्वर्ग के अधिक निकट जाओगे । तुम्हारी कलाई और भुजाएं अधिक सुदृढ़ होने पर तुम गीता को अधिक अच्छी तरह समझोगे । तुम्हारे रक्त में शक्तिकी मात्रा बढ़ने पर तुन श्रीकृष्ण की महान प्रतिभा और अपार शक्ति को अच्छी तरह समझने लगोगे । तुम जब  पैरों पर दृढ़ता के साथ खड़े होगे और तुमकों जब प्रतीत होगा कि हम मनुष्य है, तब तुम उपनिषदों को और भी अच्छी तरह समझोगे और आत्मा की महिमा को जान सकोगे।”

दिनचर्या में क्या करें और क्या न करें ? दिनचर्या कितनी महत्वपूर्ण है ?

शारीरिक शिक्षा का अर्थ

शारीरिक शिक्षा का शाब्दिक अर्थ तो ‘शरीर की शिक्षा है’ परन्तु इसका भाव शरीर तक सीमित नहीं है । वास्तव में  शारीरिक शिक्षा के द्वारा बालक का शारीरिक, प्राणिक, मानसिक, नैतिक एवं आतिम्क विकास होता है, उसका सम्पूर्ण व्यक्तित्व सुगठित होता है । शारीरिक शिक्षा केवल शारीरिक क्रिया नहीं है । “शारीरिक शिक्षा, शिक्षा ही है । यह वह शिक्षा है जो शारीरिक क्रियाओं द्वारा बालक के सम्पूर्ण व्यक्तित्व, शरीर, मन एवं आत्मा के पूर्ण विकास हेतु दी जाती है ।”

शिक्षा के उद्देश्यों की पूर्ति में शारीरिक शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान है । खेल के मैदान में, धरती माता की धुल में ही बालक के व्यक्तित्व का वास्तविक गठन होता है । खेलों के द्वारा स्फूर्ति, बल, निर्णय शक्ति, संतुलन, साहस, सतकर्ता, आगे बढ़ने की वृति, मिलकर काम करने की आदत, हार जीत में समत्व-भाव, अनुशासनबद्धता आदि शारीरिक, नैतिक, सामाजिक एवं आत्मिक गुणों का विकास होता है । शारीरिक क्रियाकलापोंव्यक्ति खुलकर बाहर आता है । भीतर की कुछ कुंठाएं, घुटन, निराशा आदि खेल की मस्ती में घुल जाती है । उत्साह उमड़ता है । क्रियाशीलता बढ़ती है, और उसे योग्य दिशा मिलती है । आनंद की प्राप्ति होती है, और आनंद में ही मानव के विकास की प्रेरणा निहित है ।

शारीरिक शिक्षा के अंग

भारतीय मनोविज्ञान में मानव की भौतिक काय को स्थूल शरीर कहा गया है । इस स्थूल शरीर के दो भाग है । स्थूल देह को अन्नमय कोश एवं दुसरे भाग को प्राणमय कोश कहा गया है । अत: शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत अन्नमय कोश और प्राणमय कोश-दोनों का विकास सम्मलित है । सामान्य भाषा में अन्नमय कोश के विकास को शारीरिक विकास एवं प्राणमय कोश के विकास को संवेगात्मक विकास कहा जाता है ।

शारीरिक विकास

उद्देश्य – शारीरिक विकास के तीन प्रधान उद्देश्य है :-

  1. शरीर को ह्ष्ट-पुष्ट, सुन्दर, सुडौल बनाना एवं उसकी क्षमताओं का विकास करना ।
  2. शरीर के सभी अंगों एवं संस्थानों की क्रियाओं का सर्वांगपूर्ण, प्रणालीबद्ध और सामंजस्यपूर्ण विकास करना ।
  3. शरीर का पूर्ण निरोग रहना । यदि शरीर में कोई दोष और विकृति हो तो उसे सुधारना । विशेष रूप से आँख, कान, नाक आदि इन्द्रियों को निरोग एवं क्षमतावान बनाना ।

    अष्टांग योग क्या हैं व मनुष्य जीवन में इनका क्या महत्व हैं ?

शारीरिक विकास के आवश्यक तत्व

शारीरक विकास के निम्नांकित आवश्यक तत्व है :-

  1. भोजन- शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भोजन का संतुलित एवं नियमित होना आवश्यक है । छात्रों को यह ज्ञान होना चाहिए कि संतुलित भोजन क्या होता है और भोजन नियमित समय पर और कितनी मात्र में किस प्रकार करना चाहिए । पानी पीने के नियमों की जानकारी उपयोगी है । भोजन में स्वच्छता एवं पवित्रता का ध्यान रखना चाहिए । यह जानना आवश्यक है कि हम अपने शरीर को सबल और स्वस्थ रखने के लिए भोजन करते है, स्वादेन्द्रिय को सुख देने के लिए नहीं ।
  2. स्वच्छता- शरीर को निरोग एवं स्वस्थ रखने के लिए स्वच्छता आवश्यक है । नियमित स्नान के द्वारा शरीर को स्वच्छ रखना, दांत, नाख़ून, वस्त्र आदि स्वच्छता, रहने, बैठने के स्थान आदि की स्वच्छता-इन पर विशेष ध्यान देना चाहिए ।
  3. विश्राम- शरीर को समुचित विश्राम मिलना चाहिए । विश्राम अथवा सोने की अवधि आयु के अनुसार अलग-अलग हो सकती है । सोने का स्थान बिलकुल शांत और हवादार होना चाहिए । स्नायुओं को आराम पहुँचाने के लिए पूर्ण निद्रा आवश्यक है । प्रत्येक व्यक्ति को जाग्रत अवस्था में मांसपेशियों और स्नायुओं को विश्राम देने की विधि जननी चाहिए । योगासनों में शवासन या शिथिलता की क्रिया इसके लिए बहुत उपयोगी है ।

    रात्रि के नियम दीर्घायु के लिए क्यों आवश्यक है ?

  4. व्यायाम- शरीर के विकास के लिए मांसपेशियों में अच्छी गति और संतुलित वृद्धि लाने के लिए प्रतिदिन व्यायाम आवश्यक है । बालकों के दैनिक कार्यक्रम में व्यायाम, खेल-कूद को अच्छा स्थान देना चाहिए । रीढ़ की हड्डी और जोड़ो का कड़ा पद जाना रुकना चाहिए । यह शरीर के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है । इसके लिए योगासनों का अभ्यास बहुत उपयोगी है । इनसे शरीर नमनीय एवं लचीला, सुन्दर, सुडौल बनता है ।

    प्राणायाम क्या है, कैसे किया जाता है और इसका क्या लाभ है ?

  5. सद्विचार एवं नियमितता- जीवन में सद्विचार, नियमितता तथा स्वस्थ आदतों का शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान रहता है । छोटी आयु से ही बालकों में शारीरिक स्वास्थ्य, शक्ति, सामर्थ्य और सुन्दर, सुडौल शरीर के प्रति आदत का भाव सिखाना चाहिए । अच्छी आदतों, अच्छे विचारों का शारीरिक स्वास्थ्य से घनिष्ठ सम्बन्ध है । ब्रह्मचर्य की साधना शरीर को बलशाली, सुन्दर, सुडौल और अदम्य क्षमतावान बनाती है । इसका महत्व छात्रों को यथासमय बताना चाहिए ।
  • वैदिक धर्मी

Follow:- Thanks Bharat On YouTube Channel