हनुमान जी कौन थे ? क्या लंका में तैरकर गए ??

क्या हनुमान जी लंका में तैरकर गए थे ?

पूर्ण ब्रहमचारी हनुमान जी के विषय में आज एक आम अवधारणा लोगों में बनी हुई है कि हनुमान जी समुन्द्र के उस पार लंका में माता सीता से मिलने उड़कर गए थे । क्योंकि यही हमने टीवी में देखा है और यहीं हमने अपने बुजुर्गों से सुना है ओर यही पढ़ाया जाता है । अगर कोई बात हर जगह एक ही सुनने में आती है तो उसे बिन जांचे सर्वसत्य भी मान लिया जाता है। ऐसी बहुत सी घटनाये  है जिनको हमने न तो पढ़ा और न ही उन पर विचार किया । बस मान लिया कि यहीं सत्य है।

हनुमान जी का विवाह किससे हुआ ?

रामायण आज से 9,00,000 वर्ष पूर्व हुई थी। तो सत्य-सत्य रामायण का आपके पास होना बहुत कठिन है। क्योंकि इन बीते हुए वर्षो के अंदर कोई भी ऐसी वस्तु, सामग्री या कोई भी ऐसा व्यक्ति नही है और ना ही होगा जिसका सत्य-सत्य इतिहास आपके सामने हो, विचार आपके सामने हो ।

क्या हनुमान जी की मृत्यु युद्ध के दौरान हुई ?

रामायण के सुन्दर काण्ड-(प्रथम सर्ग) में  किसी में 27 व 29 वा शलोक है जिसमे कहा गया है कि “हनुमान जी पर्वत के समान दृढ़  निश्चय वाले लग रहे है ओर उनको इतना तेज समुन्द्र में तैरता देख यह प्रतीत हो रहा है कि जैसे वे पवन पुत्र हो जो वायु के पुत्र के समान समुन्द्र में तैरते हुए आगे बढ़ रहे हो।

हनुमान जी के विवाह का रहस्य >>>>

शलोक न. 67 में कहा गया है कि श्री हनुमान जी ऐसे लग रहे है कि जैसे नौका का ऊपर का हिस्सा हवा में ओर निचे का हिस्सा पानी मे है अर्थात वो तैरते हुए आगे बढ़ रहे थे। अगर हनुमान जी उड़कर जाते तो इस शलोक में  समुन्द्र की नौका और पानी का जिक्र ही नही होता । इसी शलोक में कहा गया है कि समुन्द्र के जिस जिस भाग से हनुमान जी जा रहे थे। तब उनके हाथों के वेग से बहुत ऊँची तरेंगे निकल रही थी। मानो हवा के वेग से आगे बढ़ रहे हो।

हनुमान जी की ये 10 बाते कर देंगी आपको हैरान ???

शलोक न. 69  :- हनुमान जी पर्वतों के अनुसार इस प्रकार आगे बढ़ रहे थे। जैसे कोई पर्वत का टुकड़ा समुन्द्र में डाल दिया हो और उससे जो तरंगे उठती है इसी प्रकार महाकपि अर्थात हनुमान जी अपनी छाती से पानी को चीरते हुए आगे बढ़ रहे थे।

शलोक न. 70 :- हनुमान के वेग से इतनी भीषण तरंगे उठ रही थी मानो गर्जना हो रही हो। इतनी वेग से वह आगे बढ़ रहे है।

शलोक न. 71 :- हनुमान जी समुन्द्र में इस प्रकार आगे बढ़ रहे थे मानो जैसे कोई चीज फेंक दी हो और आसमान और पृथ्वी के बीच से गुजर रही हो ।              www.vedicpress.com

शलोक न. 76 :- हनुमान जी को समुन्द्र में बिना थकावट के इस वेग से बढ़ता देख जो आस-पास नाग, अक्ष ओर अन्य प्रकार की प्रजातियां थी। वह सब उसकी प्रशंसा करने लगे।             अभिमन्यु के चक्रव्यूह का हैरतअंगेज सच

हनुमान जी के रामेश्वरम से श्री लंका जाने तक बीच की दूरी आज की गणना के अनुसार 50 Km है। ओर प्राचीन ग्रंथों के अनुसार 48 km से कुछ मीटर ज्यादा।

इतनी दूरी तक तैर कर जाना कोई आम बात नही जबकि समुन्द्र में भिन्न -भिन्न प्रकार की मछली, कीड़े, सांप आदि खतरनाक जीवो को पार करना कोई खेल नही हैं। और श्लोकों में भी समुन्द्र में जहरीले सांपो का जिक्र किया गया हैं। अगर हनुमान जी उड़कर जाते तो इन सब चीजों जिक्र नही होता। श्री राम की सेना में मौजूद लोगों  में से कोई ऐसा नही था जो 48 km तैर कर जा सके । अगर कोई महाबाहु, महाबली कोई था तो सिर्फ हनुमान जी ही थे जिनपर श्री राम को पूर्ण विश्वास था। आज आम लोगो से 48 km चला नही जा सकता । हनुमान जी लंका तक केवल तैरकर ही गये थे ।

अगर वो उड़ कर जाते तो रडार में आ सकते थे । जिससे वो पकड़े जाते । उस समय के लोग अनुशासन के अंतर्गत कार्य करते थे। और खान-पान भी उचित प्रकार का था। इतनी दूर तैरकर जाना 9,00,000  वर्ष पहले आम बात तो नही लेकिन एक ब्रह्मचारी के लिए कुछ भी कठिन नही था। और आज के युग में भी ब्रह्मचर्य तो है लेकिन श्री राम जैसा कोई राजा नहीं है। लेकिन वर्तमान काल की रामायण में हनुमान जी को दैवीय शक्तियों से युक्त उड़ता हुआ दिखाया जाता है। अगर उनको उड़कर जाना होता तो एक विमान जितनी ऊचाई पर उड़कर जा सकते थे। लेकिन उनको समुद्र से 8 से 10 फीट ऊपर ही उड़ता हुआ दिखाया गया है।