BIBLE ईश्वर प्रेरित ग्रन्थ है या नहीं तर्क की कसौटी पर

 

क्या बाइबिल (Bible) ईश्वर प्रेरित ग्रन्थ हैं ?

आखिर में, असली सवाल यह नहीं कि बाइबिल (Bible) एक ईश्वरीय ग्रन्थ है या नहीं, बल्कि यह है कि यदि पुस्तक सच्ची किताब है, तो इसको ईश्वर प्रेरित होने की आवश्यकता नहीं हैं । यदि यह सच्च है तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि इसे किसी अच्छे आदमी ने लिखा था, या ईश्वर प्ररित है । गुणांक तालिका (जैसे 2*2) उतनी ही उपयोगी और सच्ची है मानों ने इसके अंकों को परमेश्वर ने बनाया हो ।

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यदि बाइबिल (Bible) वास्तव में सच्ची है, ट इसके सच्चे होने के दावे को ईश्वर प्रेरित कहने की आवश्यकता नहीं है, और यदि यह सच्ची नहीं हैं, तो इसके ईश्वर प्रेरित होने की सच्चाई को साबित करना मुश्किल हो जायेगा । वास्तविकता तो यह है कि सच्चाई को ईश्वर प्रेरित होने की आवश्यकता नहीं है । झूठ या किसी गलती के अलावा, कसी और को, ईश्वर प्रेरणा की आवश्यकता नहीं होती है। जहाँ सच्चाई समाप्त हो जाती है, तथा जहाँ संभावना रुक जाती हैं वहीँ ईश्वर प्रेरणा की आवश्यकता होती हैं ।

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सच्चाई ने किसी चमत्कार के साथ साझेदारी नहीं की है । सच्चाई को किसी प्रकार के चमत्कार की सहायता की आवश्यकता नहीं होती है । विश्वभर में एक सच्चाई प्रत्येक दूसरी सच्चाई के साथ अनुकूल सिद्ध होगी क्योंकि सब दूसरी सच्चाईयों का परिणाम है ।मगर एक झूठ, एक दूसरे झूठ के अलावा किसी अन्य के साथ अनुकूल नहीं हो सकेगा । क्योंकि वह इसी उद्देश्य के लिए गढ़ा गया है ।

यदि बाइबिल  (Bible) वास्तव में ईश्वर की रचना है, तो इसमें उदात्त और महानतम सत्यों का समावेश होना चाहिए । इसे, हर दृष्टि से, मानव कृतियों से श्रेष्ठतर होना चाहिए । इस पुस्तक के अन्दर, न्याय की सर्वश्रेष्ठ और उदारतम परिभाषाएं, तथा मानव स्वतंत्रता की सबसे अधिक सत्यपूर्ण अवधारणायें तथा कर्तव्य पालन की सुस्पष्ट रूपरेखाएँ, एवं उदारतम, उच्चतम और श्रेष्ठतम विचार होने चाहिए, न कि वे जिन्हें मानव मस्तिष्क ने विकसित किया है, बल्कि वे जिन्हें कि मानव मस्तिष्क आत्मसात करने योग्य हैं । ईश्वरीय पुस्तक के प्रत्येक पन्ने पर इसके दैवी उत्पत्ति होने से सुपष्ट प्रमाण मिलने चाहिए । (प्रस्तावना, दी बाइबिल हैंड बुक, पृ. *1)

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इस सन्दर्भ में एलिजा बेथ कैडी स्टानटन कहती है: बाइबिलिय (Bible)  इतिहासकार ओल्ड और न्यू टेस्टामेंट में विशेष दैवी प्रेरणा का दावा करते है जबकि इन पुस्तकों में उसी घटना के विषय में चमत्कारों, जोकि सुप्रसिद्ध नियमों के विरुद्ध है, एवं उन नीति रिवाजों जो कि स्त्रियों को अवमानित करती हैं, के विषय में अत्यधिक परस्पर विरोधी कथन विद्यमान है । ये कथन आपतिजनक भाषा में है जिसे कि किसी स्वछन्द सभा में नहीं पढ़ा जा सकता है, और फिर भी इसे ‘दैवी वचन’ कहा जाता है” (वोमेन्स बाइबिल इंट्रो पृ. 12)

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  • वैदिक धर्मी

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