Hindu Festivals In Hindi हिन्दू त्यौहार

Hindu Festivals In Hindi

आर्यसमाज स्थापना दिवस व नववर्ष :- इसे संवत्सरेष्टि भी कहते है। यह चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। यह सृष्टि(sristi) का भी प्रथम दिवस(day) है। इसी दिन परमपिता परमेश्वर ने संध्या के अघमर्षण मंत्र के अनुसार “सत्य” अर्थात् सत्य स्वरूप प्रकृति को नाना रूपों में प्रकट किया था। यह भारतीय परंपरा अनुसार वर्ष(year) का भी पहला दिन है। महर्षि दयानन्द जी ने भी इसी दिन 1875 ई० में आर्यसमाज की स्थापना(establishment) की थी। (Hindu Festivals In Hindi)

रामनवमी (चैत्र शुक्ला नवमी):- इस दिन आर्य (arya) जाति के उज्जवल रत्न विश्व विख्यात मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचन्द्र जी (shri ram ji) जी का जन्म हुआ था।  (www.vedicpress.com)

रक्षाबन्धन (श्रावण शुक्ला पुर्णिमा):- इसे श्रावणी उपाक्रर्म या ‘राखी’ भी कहते है। लोगों में स्वाध्याय, वेदपाठन, श्रावण तथा सत्संग की भावना पैदा करने के लिए ही ऋषियों ने यह त्योहार(festival) निर्धारित किया। इसी दिन से ब्राह्मण वेदों(vedas) के पठन-पाठन तथा स्वाध्याय द्वारा वेदों की रक्षा(defence) का, क्षत्रिय स्वाध्याय तथा बल द्वारा देश की रक्षा का, वैश्य स्वाध्याय तथा अन्न, धन्य-धान्य द्वारा देश को खुशहाल बनाने और अकाल आदि से रक्षा करने की प्रतिज्ञा करते थे अत: इसे रक्षाबन्धन(Raksha Bandhan) भी कहते है। बहन और भाई के पवित्र सम्बन्धों को तरोताजा रखने वाला भी यही त्योहार है। (Hindu Festivals In Hindi)

जन्माष्टमी (भाद्रपद कृ० अष्टमी):- इस दिन आर्य राष्ट्र के महान सपूत योगिराज श्रीकृष्ण जी (shri krishn ji) का उनके अत्याचारी मामा कंस के कारागार में (मथुरा) जन्म(birth) हुआ था।

विजयादशमी (आश्विन शुक्ला १०):- इस दिन क्षत्रिय लोग वर्षाकाल में मैले तथा जंग लगे अपने अस्त्रों-शस्त्रों(weapons) को साफ कर उन्हें युद्ध के लिए तैयार करते थे तथा शरदकालीन विजय यात्रा के लिए रवाना होते थे।  ब्राह्मण सरस्वती विजय(विद्या के प्रचार-प्रसार) तथा वैश्य लक्ष्मी विजय (धन कमाने के लिए) रवाना होते थे।

श्रीराम ने भी आज के दिन दुष्ट रावण को मर कर विजय प्राप्त की थी।  (Hindu Festivals In Hindi)

दीपावली (ऋषि निर्वाण दिवस) (कार्तिक कृष्ण अमावस्या):- भारत एक कृषि प्रधान देश है। अत: जब शरदकालीन ज्वार, मक्की, तिल आदि अन्न पककर तैयार हो जाते है तब यह पर्व मनाया जाता है। नये अन्न की खुशी में नवसस्येष्टि यज्ञ भी होता है। क्षत्रिय लोग अपनी शारदीय विजय यात्राएं पूर्ण कर इस दिन तक लौट आते और खुशी मानते। विजय तथा नवीन अन्न की खुशी में दिये जलाये जाते है। दिये जलाने के कारण ही इसे दीपावली(diwali) कहते है।

मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी दुष्ट रावण पर विजय प्राप्त करके इसी दिन आयोद्धा आए थे। उनकी खुशी में दीप जलाये गए। तब से प्रतिवर्ष यह त्यौहार मनाया जाता है।

इसी दिन महर्षि दयानन्द सरस्वती ने अजमेर(ajmer) नगर में अपनी जीवन लीला समाप्त कर निर्वाण प्राप्त किया था। अत: इसे ऋषि निर्वाण दिवस भी कहते है।

मनुष्य जीवन का उद्देश्य अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ना है अत: अमावस्या की काली-रात को प्रकाश के प्रतीक दीपक जलाकर इसी संकल्प को दुहराया जाता है।  (www.vedicpress.com)

ऋषि बोध दिवस (शिवरात्रि फाल्गुन कृ० चतुर्दशी):- इस दिन शिव का जन्म मनाया जाता है। ऋषि दयानन्द को सच्चे शिव का ज्ञान भी इसी दिन हुआ था।

होली (वासन्ती नवसस्येष्टि) (फाल्गुन शुक्ला पुर्णिमा):- जब गेहूं, जौ, चने पकने लग जाते थे तो भारत के किसान(farmer) इस दिन नये अन्न से यज्ञ करते थे। पहले इसे अग्नि देवता को अर्पण करते थे।  इसे होमावली इसी लिए कहा जाता है।

हिरण्यकश्यप के पुत्र प्रहलाद की विजय और बहन होलिका का दहन (अन्त) भी इसी दिन हुआ था।

वसन्त ऋतु में प्रकृति भी पूर्ण यौवन पर होती है। प्राकृतिक सुंदरता को देखकर मनुष्य का भी प्रसन्न होना स्वाभाविक है अत: यह त्यौहार मनाया जाता है।

इनके अलावा बलिदानियों के बलिदान दिवस व जन्मदिवस आदि भी मनाने चाहिए। आर्य रामप्रसाद बिस्मिल का बलिदान दिवस 19 दिसंबर को , स्वामी श्रद्धानंद जी का जन्मदिवस 23 दिसंबर को , 23 मार्च को भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव आदि का बलिदान दिवस, लेखराम वीरतृत्या आदि।

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