Swami Dayananda Quotes In Hindi

Swami Dayananda Quotes In Hindi

वैदिक धर्म के मर्मज्ञ स्वामी दयानन्द सरस्वती ने किसी नए मतमतान्तर की स्थापना नहीं की और न ही कोई अपना मठ बनाया…वे जीवन भर यह कहते रहे कि अपने पूर्वज ऋषि-मुनियों की शिक्षा, ज्ञान एवं उपदेशों पर आचरण करो…परन्तु दुर्भाग्य से हमारे देश में आज भी अनेक पढ़े-लिखे स्त्री-पुरुष “महर्षि दयानंद” को नाममात्र से ही जानते है उनके अमूल्य विचारों से परिचित नहीं हो पाए है…इस संक्षिप लेख में www.vedicpress.com ने  ऋषि दयानंद के कुछ थोड़े से विचारों का संग्रह किया है… Swami Dayananda Quotes In Hindi

स्वामी दयानन्द सरस्वती के अनमोल वचन ( Swami Dayananda Quotes )

    • कोई भी राष्ट्र तभी उन्नति करता है…!! जब उसका एक धर्म , एक भाषा और एक ही ध्येय (aim) हो…

    • सर्वतन्त्र सिद्धांत अर्थात् सामान्य सार्वजनिक धर्म, जिसको सदा से सब मानते आये, मानते है और मानेंगे भी इसलिए उसको सनातन नित्यधर्म कहते है कि जिसका विरोधी कोई भी न हो…

    • यदि हम आर्य लोग वेदोक्त धर्म के विषय में प्रीतिपूर्वक पक्षपात को छोड़कर विचार करें तो सब प्रकार का कल्याण ही होगा यही मेरी इच्छा है…

    • लोभ कभी समाप्त न होने वाला रोग है…

    • कोई कितना ही करे परन्तु जो स्वदेशीय राज्य होता है, वह सर्वोपरि उत्तम होता है…

    • जिस देश के पदार्थों से अपना शरीर बना, अब भी पालन होता है, आगे होगा उसकी उन्नति तन, मन, धन से सब जने मिलकर प्रीति से करें….

    • जो मनुष्य दूसरों का मांस खाकर अपना मांस बढ़ाना चाहता है, उससे बढ़कर नीच और कौन होगा ?

    • जो आलस्य युक्त जन पुरुषार्थ नहीं करते, वे अभीष्ट सिद्धि को प्राप्त नहीं होते…

    • धार्मिक व सज्जन मनुष्य का विश्वास व मान्य शत्रु भी करते है…

    • धन का स्वभाव है निर्दयी, आलसी और कर्महीन बनाना, इसलिए धन पाकर भी मनुष्य को पुरुषार्थी और परोपकारी बनना चाहिए…




  • मनुष्य को चाहिए कि वह अन्यायकारी बलवान से भी न डरे और धर्मात्मा निर्बल से भी डरता रहे…

  • जो मनुष्य ईश्वर की स्तुति, प्रार्थना और उपासना नहीं करता वह कृतघ्न और महामूर्ख होता है…

  • सब मनुष्यों का विद्वान होना तो संभव नहीं, परन्तु जो धर्मात्मा होना चाहे तो सभी हो सकते है…

  • एक गाय की पीढ़ी में 4 लाख 75 हजार 600 मनुष्यों का पालन होता है…

  • जिनके मरे पर चमड़ा भी कंटक आदि से रक्षा करे उनके गले छुरों से काटकर जो अपना पेट भरते है उनसे अधिक विश्वासघाती, अनुपकारक, दुःख देने वाले, पापी जन और कोई नहीं…

  • तुम्हारा तन, मन, धन गाय आदि की रक्षारूप परोपकार आदि में न लगे तो किस काम का ?

  • गाय आदि पशु के नाश होने से राजा और प्रजा का भी नाश हो जाता है…

  • जब आर्यावर्त में तोप व वायुयान थे, तब यूरोप वाले जंगली थे…

  • आर्यावर्त में दरिद्र के घर भी विमान थे…

  • अयोग्य व्यक्ति को कभी कुछ नहीं देना चाहिए बल्कि उसे योग्य बनाने का प्रयास करना ही आपकी दया को प्रदर्शित करता है…

ऐसे ही क्रांतिकारी विचारों को जानने के लिए www.vedicpress.com पर निरंतर आते रहे और जीवन के विभिन्न पहलुओं से सम्बंधित अनमोल वचनों व विचारों के संग्रह प्राप्त करते रहे | Swami Dayananda Quotes

वैदिक धर्म की जय

भारत माता की जय

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