आर्य समाज से विश्व गुरु आर्यावर्त्त की ओर अग्रसर कैसे ?

आर्य समाज के बारे में भिन्न-भिन्न धारणाएं

आर्यसमाज के विषय में आज लोगों में भिन्न-भिन्न प्रकार की भ्रान्तिया है। कुछ लोगों का मानना है की आर्यसमाज नास्तिक संगठन है जो ईश्वर को नहीं मानते । मूर्ति-पूजा  के विरुद्ध है ।  आर्य समाज के नियम बहुत कठिन   है ।  आर्य समाज एकमात्र ऐसा संगठन है जो  लोगों को बरगलाने का कार्य करता है और भी बहुत सारी बाते है जो विभिन्न मत-सम्प्रदाय के द्वारा कही जाती है।  लेकिन आज www.vedicpress.com  आपकी आँखों से सच और झूठ का पर्दा हटाकर रहेगा ।  और आपको सत्य-सत्य जानकारी से अवगत कराने का प्रयास  करेगा और करता भी रहा है ।

आर्य समाज क्या है ??

आर्यसमाज ब्रह्मा से लेकर स्वामी दयानंद पर्यन्त ऋषियों-मुनियों द्वारा स्वीकार्य सत्य, शास्वत एवं सर्वकल्याणकारी वैदिक सिद्धान्तों का प्रचारक-प्रसारक संगठन है। स्मरण रहे श्रेष्ठ, सदाचारी, चरित्रवान एवं परोपकार व्यक्तियों के समाज को आर्यसमाज कहते है।

आर्य समाज कोई मत, पन्थ या सम्प्रदाय नहीं है क्योंकि यह ईश्वरिय ज्ञान वेद पर आधारित है। वेद प्रतिदिन वैदिक धर्म (मानव धर्म) ही आर्यसमाज का मन्तव्य है। याद रहे जैसे ईश्वर नित्य है, वेद ज्ञान नित्य है, वैसे ही वैदिक भी नित्य है।

देश को आजाद कराने में कौन सा संगठन प्रमुख है ??

आर्य समाज की स्थपाना

यह  दयानंद पर आधारित नहीं है। स्वामी दयानन्द ईश्वरीय वाणी वेदों के आधार पर चैत्र सुदी 5 विक्रम संवत् 1932 दिन शनिवार तदनुसार 10 अप्रैल 1875 को सांयकाल साढ़े पांच बजे मुम्बई नगर के गिर गांव (काकड़वाड़ी) मुहल्ले में डॉ0 माणिकचन्द्र की वाटिका में ‘आर्यसमाज’ नाम की संस्था का गठन किया , जिसका मुख्य उद्देश्य वेद प्रचार द्वारा जनता को सच्चे वैदिक धर्म की शिक्षा देना है।  क्रांतिकारियों को किसने पनपाया ??

आर्यसमाज के नियमों को समझकर इस पर चलने की प्रतिज्ञा करके कोई भी व्यक्ति आर्य समाज का सभासद बन सकता है। इस समय सम्पूर्ण भारतवर्ष में जगह-जगह आर्यसमाज स्थापित है। भारत के बाहर अमेरिका, इंग्लैंड, मॉरीशस, गुयाना, अफ्रीका, ट्रीनीडाड, हालैण्ड, फिज़िद्विप, नेपाल आदि देशों में भी आर्य समाज की शाखाएं है।

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  • वैदिक धर्मी

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