खासी के कारण, प्रकार और खासी का रामबाण इलाज

खासी के कारण, प्रकार और उपाय

खासी एक भयानक रोग है। अगर खासी का समय रहते इलाज नही हो पाता तो यह भयंकर रोग बन जाता है। बहुत कड़े परहेज करने पर पुरानी खासी में आराम मिलता है। खाँसी एक ऐसा रोग है। जिसका समय पर इलाज बहुत जरूरी है।
फेफड़े की जलन, गले की नली की खराबी, सर्दी, जुकाम आदि रोगों में खांसी होती हौ। खाँसी कुछ दिन लगातार रहने पर अनेक रोगों  को उतपन्न करती है। खासी कोई स्वंत्रत रोग नही है।

खासी के कारण :-

1. खसरा, निमोनिया, ब्रोकाइटिस (श्वशन नाली की सूजन) और आन्त्रिक ज्वर के कारण भी खासी को जन्म मिलता है ।

2. चिलगोजे, अखरोट, बादाम और पिस्ता आदि के खाने के तुरंत बाद ऊपर से पानी पीने से खांसी होती है ।

3. ठन्डे मौसम में ठंडी वायु के कारण ठंडी वस्तुओं का सेवन करने से खासी होती है ।
4. घी तेल से बने खाद्य पदार्थों के सेवन के तुरंत बाद पानी पीने से खांसी होती है ।
5. सर्दी के मौसम में नंगे पैर घुमने, बारिश में भीग जाने, अधिक समय का पानी में रहने के कारण और गिले वस्त्र पहनने के कारण भी खांसी होती है ।

खासी के प्रकार

1. सूखी खासी
2. कफवाली खासी
1. सूखी खांसी :-  सूखी खासी में बहुत ज्यादा बल लगाने पर थोड़ी मात्रा में कच्चा थूक निकलता है। यह शुरूआती खांसी होती है ।
2. कफवाली खांसी:-  सूखी खांसी जब लंबे समय तक ठहर जाती है तो थोड़ा-सा खासने पर भी अधिक मात्रा में बलगम निकलता है तो यह कफवाली खांसी बन जाती है ।
खाँसी का एक प्रकार और भी है जिसे कुकुर खाँसी या हुपिंग कफ कहते हौ। यह खाँसी प्रायः 2 वर्ष से 15 वर्ष के बच्चो को होती है। इस खाँसी में खाँसने पर लंबी सी आवाज आती है ओर मुंह खुल जाता है। इस खाँसी में बर्तन गिरने के जस खास शब्द उतपन्न होता है। यह खाँसी बहुत कठीन होती है। इसमें जल्दी आराम नही मिलता हौ। इसे ठीक होने में लगभग एक या दो महीना लगता है। कभी-कभी गलग्रंथि के बढ़ जाने पर भी खांसी उतपन्न हो जाती है। इसमें गले में कोई वस्तु छूती हुई प्रतीत होती है।

चिकित्सा :-

जिस कारण खासी पैदा हुई है उसकी तरफ ख्याल करके ही चिकित्सा करनी चाहिए।
1. वासानापाक- अडूसे की जड़ की छाल 250 ग्राम, 2 लीटर पानी में उबाल कर आठवा अंश शेष रहने पर छान लें। इस क्वाथ में 2 किलो चिन्नी डाल कर पकाएं, शहद जैसा गाढ़ा होने पर उतार लें और ठंडा होने पर बोतल में डाल लें। यह सभी प्रकार की खासी में काम करता है। तथा राजयक्षमा तथा रक्तप्रदर में उपयोगी है।
2. कायफल, पोहकरमूल, काकड़ासिंगी और पीपल इनका महीन चूर्ण बना लें। और शहद के साथ चटाएं। इससे कफवाली खाँसी और दमा में फायदा मिलता है। मामूली खासीतो तुरंत ठीक हो जाती है।
3.  सुहागे का लावा या फिटकरी का लावा 250 मिलीग्राम में 125 मिलीग्राम अभ्रक भस्म मिलाकर चाटने से सूखी खाँसी में आराम मिलता है।
4. 12 ग्राम हल्दी, सज्जीखार 3 ग्राम ओर पुराना गुड़ 24 ग्राम की बेर  के बराबर गोलियां बना लें। इसको मुहँ में डालकर चूसने से सब प्रकार की खासी में आराम मिलता है। विशेषकर शीतकालीन में होने वाली खासी में तुरंत आराम मिलता हैं।
5. कटेरी और अडूसे का काढ़ा में शहद और पीपल चूर्ण डालकर पिने से पुरानी कफवाली खाँसी में आराम मिलता है।
6. स्वर्गसुन्दर रस, मरिचादि गुटिका, ऐलादी वटी, सितोपलादि चूर्ण आदि आयुर्वेदिक दवाइयाँ लेने से पुरानी से पुरानी खासी में तुरंत आराम मिलता है।

खांसी की चिकित्सा  :-

7. हल्दी के 2 ग्राम चूर्ण में थोड़ी सी मात्र में सेंधा नमक मिलाकर ऊपर से पानी पीने से खासी में आराम मिलता है ।
8. बांस का रस, अदरक का रस आदि को मिलाकर उसमें शहद मिलाकर कुछ समय तक सेवन करने से भी खांसी में आराम मिलता है । मन्दाग्नि का रामबाण इलाज कैसे ??
9. 3-4 लौंग को पीसकर शहद के साथ एक दिन में मात्र 3-4 बार चुटकीभर चाटने पर खांसी में आराम मिलता है ।
10. छोटी कटेरी के फूलों को 2-3 ग्राम केसर के साथ पीसकर शहद के साथ लेने से खांसी में आराम मिलता है ।
11. सुहागे का फूला और मुलहटी को अच्छी तरह कुट-पीसकर कपड़छान कर मैदे की तरह बारीक़ चूर्ण बना लें । इनको बराबर मात्रा में मिलाकर किसी बोतल में डाल कर दिन में दो बार सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है ।
महत्वपूर्ण बात :- किसी भी खासी के रोगी को भोजन करने के कम से कम एक घंटे बाद पानी पीने की आदत डालनी चाहिए । ऐसा करने से खांसी से बचाव और पाचनतंत्र के मजबूत होने में सहायता मिलती है । अगर कभी खासी आए तो इसे रोकना नहीं चाहिए क्योंकि यह कोई स्वंत्रत रोग नहीं है बल्कि यह रोग अन्य रोगों जैसे -हिचकी, अरुचि, नेत्र रोग और ह्रदय के रोगों को जन्म देता है ।
  • वैदिक धर्मी

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