यहूदी और हिब्रू भाषा का पुनर्जन्म इस्रायल के माध्यम से

यहूदी संघर्ष की रोचक व ज्ञानवर्धक कहानी

1948 में इस्रायल के गठन के बाद घोषणा की गई कि दुनिया के किसी भी कोने का यहूदी (yahudi) हो वो इस्रायल का नागरिक माना जायेगा
दुनिया भर के यहूदी 2000 साल बाद उत्साह के साथ स्वदेश लौटने लगे यूरोप,अफ्रीका,अरब और भारत से गए ये यहूदी अपने साथ वो सब भी ले गए जो इन्होंने इन 2000 सालों में सीखा था।

अब ये यहूदी 2000 साल पहले के अपने पुरखों से बिल्कुल भिन्न थे इनके पास न तो अपनी मूल भाषा थी न ही अपना मूल पहनावा और न ही मूल खानपान था तो बस विशुद्ध यहूदी (yahudi) रक्त और स्वदेश लौटने का जज्बा।

जब ये यहूदी इस्रायल में इकट्ठे होने लगे तो इनके पास कोई ऐसी भाषा नही थी जिससे ये सभी लोग एक दूसरे की बात समझ सकें या सरकार किसी एक भाषा मे कामकाज कर सके।

यहूदी लोग अब एक दूसरे के लिए अजनबी थे ये न तो पहनावे में समान थे और ना ही भाषा और आचार व्यवहार में सरकार के सामने बड़ी विकराल समस्या उत्पन्न हो गई थी कोई ऐसा साधन नही था जिससे सभी लोगों तक अपनी बात पहुंचाई जा सके और ऊपर से चारों तरफ से दुश्मनों ने घेर रखा था

सरकार ने दुनिया भर के भाषाविद बुलाए और इस समस्या को सुलझाने के लिए सुझाव मांगे बैठक में सबने अपनी अपनी तरफ से अंग्रेजी, फ्रेंच,अरबी आदि भाषाओं के नाम सुझाए लेकिन ये इस्रायल की उम्मीदों पर खरा न उतरे।

अंत मे एक विद्वान ने विचार दिया कि अगर हिब्रू भाषा को राष्ट्रभाषा के तौर पर लागू किया जाए तो कोई विरोध नही होगा
लेकिन अब समस्या ये थी कि हिब्रू भाषा मृत घोषित हो चुकी थी और कुछ धार्मिक कर्मकांड करवाने वाले लोग ही इसे समझते थे इसे पूरे इस्रायल को सीखने में बहुत पैसा और समय लगने वाला था।
प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन ने विद्वानों से पूछा कि कितने दिन में वो हिब्रू को देशभर में लागू कर सकते हैं
जवाब मिला 10 साल । प्रधानमंत्री गुरियन ने कहा समझो 10 साल पूरे हो गए कल सुबह से देश का कामकाज हिब्रू भाषा मे होगा।
भाषाविद सकते में आ गए उन्होंने कुछ कहना चाहा लेकिन प्रधानमन्त्री बैठक से बाहर निकल गए अगले दिन से देश मे हर जगह हिब्रू भाषा मे काम -काज शुरू हो गया।
स्कूल कॉलेज सरकारी आफिस दुकानों के साइन बोर्ड सड़को के नेविगेशन बोर्ड सब हिब्रू (hibru) में थे।
दुनिया अचंभित थी कैसे यहूदियो ने एक मृत भाषा को जिंदा कर दिया।
आज हिब्रू भाषा आधुनिक भाषाओं की कतार में खड़ी है विश्व की हर बड़ी यूनिवर्सिटी में आज हिब्रू भाषा के अलग से विभाग चल रहे है ।
ये उन लोगो को जवाब है जो कहते है हिंदी देश मे लागू नही हो सकती या हिंदी पिछड़ी भाषा है और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान हिंदी भाषा मे नही दिया जा सकता ।

  • वैदिक धर्मी

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