लेबनान प्रधानमंत्री क्यों भागा देश छोड़कर ?

लेबनान प्रधानमंत्री हुआ फरार

4 नवम्बर को लेबनान के सुन्नी प्रधानमंत्री साद हरीरि ने अपने खास मित्र देश सऊदी अरब की यात्रा की।
शुरुआत में ये एक सामान्य यात्रा थी क्योंकि अरबपति हरीरि की कम्पनी सऊदी अरब की बड़ी कम्पनियों में से एक थी इसलिए उनका सऊदी अरब आना जाना लगा रहता था।
4 नवम्बर को रियाद(Riyadh) के एक सरकारी टीवी चैनल से लाइव होकर हिजबुल्लाह(Hezbollah) से अपनी जान का खतरा बताते हुए उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी।दुनिया सकते में आ गई कि ऐसा क्या हो गया कि एक प्रधानमंत्री को दूसरे देश में बैठकर अपने इस्तीफे के एलान करना पड़ा।
हरीरि ने ईरान और उसके समर्थित हिजबुल्लाह पर लेबनान को अस्थिर करने के आरोप लगाते हुए वापस जाने से मना कर दिया और कहा अगर वो वापस गए तो उनकी जान को खतरा है।
रोचक बात ये है कि अरबपति बिजनेसमैन हरीरि के पिता की हत्या 2005 में(bomb blast) हिजबुल्लाह ने करवा दी थी इसलिए हो सकता है कि उनकी जान को खतरा वाकई हो। www.vedicpress.com
लेकिन ईरान और हिजबुल्लाह ने इसके विपरीत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सऊदी ने प्रधानमंत्री को बंधक बना लिया है और उनसे जबरन इस्तीफा दिलवाया गया है।
हिजबुल्लाह ने लेबनान में प्रदर्शन शुरू कर दिए कि सऊदी उनका प्रधानमंत्री वापस करे।उनका तर्क ये है कि हरीरि की कम्पनी पर सऊदी सरकार का करोडों डॉलर का कर्ज बाकी है जिसकी उगाही के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री को बंधक बना लिया है।
लेकिन नाटकीय ढंग से 22 नवम्बर को लेबनानी स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री स्वदेश लौट और देश के ईसाई राष्ट्रपति को लिखित रूप में इस्तीफा दिया लेकिन राष्ट्रपति ने इसे अस्वीकार कर दिया।हरीरि फिर से देश छोड़कर चले गए अब लेबनान बिना प्रधानमंत्री के लावारिस की तरह हो गया है जो कि ईरान और सऊदी की शिया सुन्नी लड़ाई का मैदान बनने जा रहा है।लेबनान का हश्र जल्द ही सीरिया जैसा होने वाला है लेकिन यहां एक नया परन्तु मंझा हुआ खिलाड़ी शामिल होने वाला है और वह है इस्राइल।

हिजबुल्लाह का लक्ष्य है इस्राइल को समाप्त करना क्योंकि यह एक शिया संगठन है इसलिए सऊदी की आंख में भी चुभता है और सीरिया में इसने असद सरकार को बचाने में अहम भूमिका निभाई है।अब सऊदी सीरिया की लड़ाई को हिजबुल्लाह के आंगन में ले आया है और उसके साथ है इस्राइल।
जल्द ही हमे मध्य पूर्व फिर से जलता दिखेगा क्योंकि अभी तेल बाकी है मेरे दोस्त….www.vedicpress.com

●वैदिक धर्मी

1 Response

  1. दुनिया को ये समझना चाहिए की इस्लाम कभी भी शांति प्रिय नही हो सकता इस बात को सिद्ध करने के लिए इनकी बकवास कुरान या हदीस उठाने की जरूरत नही ह बल्कि इस बात के हज़ारो उदहारण ह या तो आप इतिहास उठा कर देख लो और अगर इतिहास को भी नकार रहे हो तो वर्तमान में देख लो।
    अगर आप घ्यान से बातो को समझ पाते हो तो आप को आखिर में ये मिलेगा की ये जो मुस्लिम हैं इन्हें आखिर में आकर लड़ना ही ह और इंसानियत का दमन ही करना ह।
    बात ये नही ह के ये सिर्फ काफिर या non believers of islam के खिलाफ खड़े ह आज 50 से ज्यादा मुस्लिम देश ह इस दुनिया में और लगभग 120 से ऊपर के देशों में ये अपनी अछि मौजूदगी रखते ह। आप देखेंगे कि ये अपने अपने स्तर पर जितना हो सके उतना इस्लामियत कटरवादिता आतंकवादी हरकत करते हैं।
    अभी का ताजा उदाहरण ह मिस्र egypt जहां 300 लोग से ज्यादा मारे गए क्या वो 300 लोग क्या हिन्दू थे इसाई थे क्या यहूदी थे यहां तक कि शिया मुस्लिम भी नही थे सुन्नी ही थे।
    अभी तक लोग ये ही जानते ह की इनके सिर्फ 2 ही पन्थ ह शिया और सुन्नी या फिर लोगों को इनका भी नही पता। बोलते ह की इस्लाम में कोई अलग नही कोई जात पात नही ह सब अल्लाह को मानने वाले ह monotheism ह पर नही ये तो हर जगह अलग ह।
    एक हमे ये जब दिखते ह जब ये भारत जैसे देश में ह जहां ये कम ह।
    इस्लामियत इंसानियत के विरुद्ध ह।

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