गाय के गोबर से उड़ेगा हवाई-जहाज़ australian-scientist-claims

  गाय के गोबर से उड़ेगा हवाई-जहाज़ (Australian-scientist-claims)हवाई जहाज

 ये दावा देश के किसी हिन्दूवादी संगठन का नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई युवा वैज्ञानिकों के एक दल का है । भविष्य में(IN FUTURE) एयरक्राफ्ट(AIRCRAFT) कैसे होंगे और उनमें किस तरह का ईंधन इस्तेमाल होगा , इसके बारे में इन दिनों यूरोप में एक मुकाबला चल रहा है l इसमें दुनियाभर के वैज्ञानिकों को अपने आइडिया या मॉडल पेश करने थे । यूरोप की प्लेन बनाने वाली कंपनी एयरबस ने इस मुकाबले का आयोजन किया था । इसके आखिरी में जो पाँच आइडिया शार्टलिस्ट किए गए उनमें से एक गोबर से प्लेन उड़ाने वाला भी था ।

टीम क्लीमा नाम के वैज्ञानिक दल ने दावा किया है कि गाय के गोबर(COW PAT) से भारी मात्रा में बनने वाली मीथेन गैस(METHANE OR MARSH GAS) को प्लेन में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है । मॉडल के मुताबिक , इस गैस को खूब ठंडा करके एक किस्म के साँचे में भर दिया जाएगा । यहाँ से ईंजन की जरूरत के मुताबिक ईंधन की सप्लाई होती रहेगी ।

वहीं क्लीमा टीम का दावा है कि गोबर से बनने वाला ईंधन कार्बन-डाईआक्साईड का बनना 97 % तक कम कर सकता है । ऋग्वेद(RIGVED) में भी बताया है कि जो ऊर्जा-शक्ति या गुण सूर्य(SUN) में है वहीं गाय(COW) में भी मौजूद है । अमेरिका में खेती में काम आने वाले कई वाहन इसी तरह के ईंधन से चलते है । भारत में भी कई गांवो में इस प्रकार से मीथेन गैस पैदा करके ऊर्जा की जरूरतों को पूरा किया जाता रहा है । राजीव दीक्षित जी ने बहुत पहले से ही इस ऊर्जा को भविष्य के लिए आवश्यक बताते हुए इस क्षेत्र में काम किया था । इससे हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें अपने पशुधन को सुरक्षित रखना होगा न सिर्फ धार्मिक , आर्थिक या स्वास्थ्य के लाभ के लिए बल्कि भौतिक विज्ञान तथा पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी पशुधन(LIVESTOCK) अति आवश्यक है ।

                                             – ( संघमार्ग पत्रिका – 28 जुलाई 2013 )