मनुष्य के जीवन और मृत्यु mystery of life and death

मनुष्य के जीवन और मृत्यु mystery of life and death

* ईश्वरउपासना जीवन(life) और प्रकृति उपासना (जड़ पुजा) मृत्यु(death) है ।

* विद्या जीवन और अविद्या मृत्यु है ।

* सत्य जीवन और झूठ मृत्यु है ।

* धर्म जीवन और अधर्म मृत्यु है ।

* परोपकार जीवन और स्वार्थ मृत्यु है ।

* पुरुषार्थ जीवन और आलस्य मृत्यु है ।

* ब्रह्मचर्य जीवन और व्याभिचार मृत्यु है ।

* सादापन जीवन और सजावट मृत्यु है ।

* एकता जीवन और विरोध मृत्यु है ।

* मित्रता जीवन और शत्रुता मृत्यु है ।

* वीरता जीवन और कायरता मृत्यु है ।

* सत्संग जीवन और कुसंग मृत्यु है ।

* संतोष जीवन और लोभ मृत्यु है ।

* अहिंसा जीवन और हिंसा मृत्यु है । ( यदि कारण हो तो लाखों मनुष्यों को भी मौत के घाट उतरना अहिंसा(non-violence) है और बिना कारण एक चींटी को मारने की सोचना भी हिंसा है । )

* कृतज्ञता जीवन और कृतघ्नता मृत्यु है ।

प्रत्येक मनुष्य जीवन से प्रेम रखता है और मृत्यु से डरता है । इस कारण उपर्युक्त मृत्यु के साधनों से घृणा(hate) करना उचित है । हमारे सभी आर्ष ग्रंथो(aarsh books) में यही सत्य ज्ञान दिया गया है । यह मनुष्यों के लिए एक आज्ञा(Command) भी है उस परमपिता परमात्मा की जिसे मानना हमारा परम धर्म भी है । वैदिक साहित्य सम्पूर्ण ज्ञान-विज्ञान से परिपूर्ण है। सारे विश्व को मनुष्य बनो का पाठ सिखाते हुए वेद(veda) भगवान कहता है कि यह ज्ञान-विज्ञान मनुष्यमात्र के लिए है न की किसी एक राष्ट्र या जाति-समुदाय आदि के लिए। दूसरी ओर वेद यह भी कहता है कि दुष्टों(wicked) का सर्वनाश करने से ही धर्म की रक्षा होती है। अत: सारे संसार के मनुष्यों के लिए यह “मनुष्य के जीवन और मृत्यु” नामक शिक्षाप्रद लेख है किसी सम्प्रदाय या राष्ट्र विशेष के लिए नहीं। आप सभी विद्या प्रेमी भाई इस लेख से एक समान लाभ उठाएंगे ऐसी आशा(Hope) है।

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