संगठन का मूल्य values of organization

संगठन का मूल्य values of organization

एक मूर्ख को कहीं से रेशम(silk) का थान मिल गया । उसने थान को बेचने की सोची । साथ ही यह भी तय कर लिया कि पूरे को एक साथ नहीं बेचना क्योंकि एक साथ ज्यादा पैसा जल्दी खर्च हो जाता है । थान को थोड़ा-थोड़ा फाड़कर बेचना चाहिए । ऐसा विचार करके उस मूर्ख ने उस रेशम के थान की केंची से कतरने-कतरने कर डाली । वह कुछ कतरने दुकान(shop) पर बेचने हेतु ले आया । जहाँ वह जाता लोग उसकी हंसी करते और उसकी कतरनों को फैंक देते व मूर्ख की उपाधि साथ में देते । अब कतरने चाहे रेशम की हों या मलमल(muslin) की । यह सब तो कूड़े के समान है । किसी व्यक्ति ने उसे बताया कि इन कतरनों का कोई मूल्य नहीं पूरा थान लाते तो उसका मूल्य(value) था । अब उसके टुकड़ों की कोई कीमत नहीं अर्थात उस थान के संगठित रूप का मूल्य था । यह बात उसकी समझ में आई और पछताने लगा ।

शिक्षा :- इसी प्रकार समाज में अकेले व्यक्ति का मूल्य और शक्ति कम होती है । संगठन का महत्व अधिक है । संगठन में ही शक्ति है।

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