वैदिक संस्कृति के कीर्तिमान vedic culture records

वैदिक संस्कृति के कीर्तिमान vedic culture records

लोगों की उदासीनता और इतिहास(history) की उथल-पुथल के कारण वैदिक(vedic) संस्कृति(culture) के उस दिव्य , भव्य , विश्वप्रसार का इतिहास दुर्लक्षित रह गया है । ईसाई(christian) और इस्लामी(islamic) मत स्थापना से पूर्व सारे विश्व में आर्य , सनातन , वैदिक धर्म(vedic religion) ही था । वैदिक जन शुद्ध वैज्ञानिक(scientist) थे । वैदिक संस्कृति के बेजोड़ कीर्तिमान निम्न कहे जा सकते है :-

वैदिक संस्कृति के 13 प्रमुख कीर्तिमान(record) :-

(१) प्राचीन विश्व में स्थान-स्थान पर बने पिरामिड , तेजोमहालय आदि जैसे भव्य , सुंदर भवन ।

(२) चंद्रलोक आदि की अंतरिक्ष(space) यात्राएँ ।

(३) सोने-चाँदी की जरी से सुशोभित वाराणसी की रेशमी साड़ियाँ ।

(४) स्पेन देश में बना प्राचीन राजमहल(palace) और करदोलहा नगर के भव्य मंदिर (जिसे गलती से इस्लाम निर्मित समझा जाता है परंतु वह हिन्दू-वैदिक वस्तुशिल्प है)।

(५) विविध प्रकार के विमान(airplane) ।

(६) अंतर्देशीय क्षेपणास्त्र और अन्य विचित्र क्षमता के अस्त्र(weapons) ।

(७) त्रिशंकु जैसे उपग्रहों(satellites) का प्रेरण ।

(८) योगविद्या के रहस्यमय कौशल ।

(९) आयुर्वेदीय कुशल , आश्चर्यकारी , सादी और अत्यल्प शुल्क की चिकित्सा पद्धति (treatment method) ।

(१०) ढाका की मलमल(muslin) जो इतनी बारीक सूत(yarn) और बुनाई की होती थी कि किसी थान की लंबी चौडाई एक साधारण अंगूठी(ring) के मध्य से निकाली जा सकती थी।

(११) विश्व(world) के समस्त मानवों का करोड़ों वर्षों तक लालन-पालन करने वाली एकमात्र सभ्यता(civilization) ।

(१२) संस्कृत(sanskrit) जैसी दैवी भाषा(language) जो सारे मानवों के आचार-विचार-उच्चार का एकमेव स्त्रोत रही है ।

(१३) वेद(veda) जो एक समस्त ज्ञान का सांकेतिक , संक्षिप्त दैवी गूढ भंडार है जिससे सारी विद्या(knowledge) और कलाओं के उच्चतम रहस्य जाने जाते है ।

महर्षि दयानन्द जी ने भी कहा है कि हमारे यहाँ जब कुछ-कुछ  वैदिक व्यवस्था थी तब दरिद्र के घर भी विमान(airplane) थे। यह बात उस समय कही थी जब विमान आदि की विश्व कल्पना भी नहीं करता था क्योंकि ए.ओ.ह्यूम ने इस बात पर महर्षि जी को पागल सन्यासी कह डाला था।  अत: आज विश्व में जो भी अच्छा है उसका मूल यही आर्यावर्त(aryavart) देश ही है ऐसा जानना और मानना ही उचित होगा जिससे सभी भारतवासी आर्य(arya) हिन्दू अपने पूर्वजों(ancestors) पर गौरव अनुभव करें और स्वाभिमान के साथ विश्व में धूम मचाएँ।

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